
करीब एक साल से लागू राष्ट्रपति शासन अब मणिपुर में हटने जा रहा है। फरवरी 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे और उसके बाद भड़की हिंसा ने राज्य को राजनीतिक ब्रेक पर डाल दिया था। तब से प्रशासन सीधे केंद्र सरकार और राज्यपाल के जरिए चल रहा था।
अब हालात में कुछ हद तक स्थिरता आने के बाद, राजनीति फिर से फाइलों से निकलकर विधानसभा की ओर लौटती दिख रही है।
NDA ने पेश किया सरकार बनाने का दावा
बुधवार को एनडीए विधायक दल के नेता वाई. (युमनाम) खेमचंद सिंह ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर नई सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश किया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी के मुताबिक, खेमचंद सिंह के नेतृत्व में एनडीए का प्रतिनिधिमंडल राजभवन (लोक भवन) पहुंचा।
इस दौरान भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुघ भी मौजूद थे।
कुकी-जो विधायकों की मौजूदगी: साइलेंट लेकिन बड़ा मैसेज
इस मुलाकात की सबसे अहम बात यह रही कि प्रतिनिधिमंडल में चुराचांदपुर और फेरजॉल जैसे कुकी-जो बहुल इलाकों के विधायक भी शामिल थे।
राजनीति की भाषा में इसे ऐसे पढ़ा जा रहा है “सरकार सिर्फ नंबरों की नहीं, संदेशों की भी बनती है।”
कौन हैं युमनाम खेमचंद सिंह?
खेमचंद सिंह मणिपुर की राजनीति में अनुभवी और स्वीकार्य चेहरा माने जाते हैं। एन बीरेन सिंह सरकार में ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री। विधानसभा स्पीकर रहते हुए निष्पक्ष कार्यशैली की पहचान। संकट के दौर में लो-प्रोफाइल लेकिन भरोसेमंद नेता। यही वजह है कि पार्टी ने उन्हें संक्रमण काल का चेहरा चुना है।
नए मुख्यमंत्री को मिलेंगी कौन-सी Powers?
राष्ट्रपति शासन हटते ही, नए मुख्यमंत्री को मिलेंगी राज्य की कार्यपालिका शक्तियां। मंत्रिमंडल गठन और विभागों का बंटवारा। कानून-व्यवस्था पर राज्य सरकार का सीधा नियंत्रण। हालांकि संवेदनशील हालात को देखते हुए केंद्र की नजर और गवर्नर की भूमिका अभी भी अहम रहेगी।

मतलब, CM की कुर्सी मजबूत है, लेकिन दिल्ली की निगरानी कैमरा मोड में।
दिसंबर से चल रही थी अंदरखाने हलचल
नई सरकार की पटकथा दरअसल 14 दिसंबर को ही लिखी जानी शुरू हो गई थी, जब मणिपुर भाजपा विधायक दल की दिल्ली में अहम बैठक हुई।
इस बैठक में मौजूद थे पूर्व CM एन बीरेन सिंह, स्पीकर थोकचोम सत्यव्रता सिंह, 34+ भाजपा विधायक, संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष, संबित पात्रा, प्रदेश अध्यक्ष शारदा देवी।
तब साफ था राष्ट्रपति शासन स्थायी समाधान नहीं, सिर्फ ब्रिज था।
आगे की राह: स्थिरता या स्टार्टिंग ट्रायल?
नई सरकार से उम्मीद है कि वह हिंसा से जूझे राज्य में विश्वास बहाल करे। सभी समुदायों को साथ लेकर चले और प्रशासन को फिर से राजनीतिक जवाबदेही दे।
अब देखना यह है कि सरकार बनना आसान था, चलाना कितना मुश्किल होगा।
कर्तव्य भी, विकास भी: Budget 2026 में योगी का साफ संदेश
